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mahabharat 13.99.d5: बुद्धिमान ऋषि पराशर ने अपने शिष्यों को अपनी सभी धार्मिक शिक्षाएँ सटीक क्रम में सिखाईं। यह एक सार्थक धार्मिक ग्रंथ था।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  13.99.d5 
धर्मोपदेशमखिलं यथावदनुपूर्वश:।
शिष्यानध्यापयामास शास्त्रमर्थवदर्थवित्॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान ऋषि पराशर ने अपने शिष्यों को अपनी सभी धार्मिक शिक्षाएँ सटीक क्रम में सिखाईं। यह एक सार्थक धार्मिक ग्रंथ था।
 
The wise sage Parashar taught all his religious teachings to his disciples with exact sequence. It was a meaningful religious text.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)