Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d46: क्योंकि ब्राह्मण तपस्या से, क्षत्रिय पालन-पोषण आदि से, वैश्य आतिथ्य से और शूद्र सेवा से यश प्राप्त करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d46
 
 
श्लोक  13.99.d46 
तपसा शोभते विप्रो राजन्य: पालनादिभि:।
आतिथ्येन तथा वैश्य: शूद्रो दास्येन शोभते॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि ब्राह्मण तपस्या से, क्षत्रिय पालन-पोषण आदि से, वैश्य आतिथ्य से और शूद्र सेवा से यश प्राप्त करते हैं।
 
Because Brahmins get glory by penance, Kshatriyas by upbringing etc., Vaishyas by hospitality and Shudras by service.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)