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mahabharat 13.99.d4: महान ऋषि पराशर ने सभी जातियों को आशीर्वाद देने के लिए स्वच्छता और अच्छे आचरण से परिपूर्ण शुद्ध और अमर धर्म का उपदेश दिया।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  13.99.d4 
वृद्ध: पराशर: प्राह धर्मं शुभ्रमनामयम्।
अनुग्रहार्थं वर्णानां शौचाचारसमन्वितम्॥
 
 
अनुवाद
महान ऋषि पराशर ने सभी जातियों को आशीर्वाद देने के लिए स्वच्छता और अच्छे आचरण से परिपूर्ण शुद्ध और अमर धर्म का उपदेश दिया।
 
The great sage Parashara preached a pure and immortal religion, full of cleanliness and good conduct, to bless all castes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)