Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d34: पानी को तीन बार चुपचाप घूँट-घूँट कर पीना चाहिए। पानी में कोई आवाज़ नहीं होनी चाहिए और घूँट-घूँट कर पानी हृदय तक पहुँचना चाहिए। विद्वान व्यक्ति को अपने अंगूठे के मूल से दो बार मुँह पोंछना चाहिए। इसके बाद इन्द्रियों के छिद्रों का स्पर्श करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पानी को तीन बार चुपचाप घूँट-घूँट कर पीना चाहिए। पानी में कोई आवाज़ नहीं होनी चाहिए और घूँट-घूँट कर पानी हृदय तक पहुँचना चाहिए। विद्वान व्यक्ति को अपने अंगूठे के मूल से दो बार मुँह पोंछना चाहिए। इसके बाद इन्द्रियों के छिद्रों का स्पर्श करना चाहिए।
While sipping water, drink water three times in silence. There should be no sound in the water and after sipping it, the water should reach the heart. A learned person should wipe his mouth twice with the base of his thumb. After this, he should touch the orifices of the senses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥