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mahabharat 13.99.d31: आपातकालीन स्थिति में, मिट्टी चार, तीन, दो या एक बार लगानी चाहिए। जगह और समय के हिसाब से, शौचालय के शिष्टाचार में संयम या सहजता बरती जा सकती है।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d31
 
 
श्लोक  13.99.d31 
देयाश्चतस्रस्तिस्रो वा द्वे वाप्येकां तथाऽऽपदि॥
कालमासाद्य देशं च शौचस्य गुरुलाघवम्।
 
 
अनुवाद
आपातकालीन स्थिति में, मिट्टी चार, तीन, दो या एक बार लगानी चाहिए। जगह और समय के हिसाब से, शौचालय के शिष्टाचार में संयम या सहजता बरती जा सकती है।
 
In times of emergency, clay should be applied four, three, two or once. Depending on the place and time, one can be modest or easy in the toilet etiquette.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)