Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d3: भीष्मजी बोले - राजन्! इस विषय में प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया जाता है, ब्रह्मवादी पराशर ने शूद्रों पर दया करने के लिए जो कुछ कहा है, वह सत्य है।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  13.99.d3 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
शूद्राणामनुकम्पार्थं यदुक्तं ब्रह्मवादिना॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन्! इस विषय में प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया जाता है, ब्रह्मवादी पराशर ने शूद्रों पर दया करने के लिए जो कुछ कहा है, वह सत्य है।
 
Bhishmaji said – King! An example of this ancient history is given in this regard, whatever Brahmavadi Parashara has said to show mercy on the Shudras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)