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mahabharat 13.99.d29: स्वच्छता के नियमों का पालन न करने से शरीर की शुद्धता को लेकर संशय बना रहता है। इसलिए ऐसे कार्य करने का प्रयास करना चाहिए जिससे शरीर शुद्ध हो।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  13.99.d29 
अवधीरयमाणस्य संदेह उपजायते।
यथा यथा विशुद्‍ध्येत तत् तथा तदुपक्रमेत्॥
 
 
अनुवाद
स्वच्छता के नियमों का पालन न करने से शरीर की शुद्धता को लेकर संशय बना रहता है। इसलिए ऐसे कार्य करने का प्रयास करना चाहिए जिससे शरीर शुद्ध हो।
 
Doubts remain about the purity of the body due to not following cleanliness rules. Therefore, one should try to do such work which will purify the body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)