Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d24: शौच के लिए बैठे हुए व्यक्ति को अपने सामने मिट्टी का घड़ा और जल का पात्र रखना चाहिए। रोगी व्यक्ति को हाथ में कमण्डलु लेकर उसे अपनी दाहिनी ओर और जांघ के बीच रखना चाहिए तथा धीरे-धीरे तथा सावधानी से पेशाब करना चाहिए, ताकि पानी उसके शरीर के किसी अंग पर न लगे। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शौच के लिए बैठे हुए व्यक्ति को अपने सामने मिट्टी का घड़ा और जल का पात्र रखना चाहिए। रोगी व्यक्ति को हाथ में कमण्डलु लेकर उसे अपनी दाहिनी ओर और जांघ के बीच रखना चाहिए तथा धीरे-धीरे तथा सावधानी से पेशाब करना चाहिए, ताकि पानी उसके शरीर के किसी अंग पर न लगे।
A man sitting for defecation should keep a clay pot and a water vessel in front of him. A patient man should hold the kamandalu in his hand and keep it between his right side and thigh and should urinate slowly and cautiously so that the water does not splash on any of his body parts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥