Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d20-d21: मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह किसी एकांत और बंद स्थान की तलाश करके, उसमें जल और सावधानी से तैयार की गई मिट्टी से भरा हुआ बर्तन रख दे और फिर उस स्थान का अच्छी तरह निरीक्षण करके चुपचाप बैठकर मूत्र त्याग कर ले। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह किसी एकांत और बंद स्थान की तलाश करके, उसमें जल और सावधानी से तैयार की गई मिट्टी से भरा हुआ बर्तन रख दे और फिर उस स्थान का अच्छी तरह निरीक्षण करके चुपचाप बैठकर मूत्र त्याग कर ले।
A person who has control over his mind and senses should look for a secluded and enclosed place and place a vessel filled with water and carefully prepared clay there. Then, after carefully examining the place, he should sit silently to urinate.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥