Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d135: भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! शास्त्रों के अर्थ को जानने वाले महामुनि पराशर इस प्रकार चारों वर्णों के कर्तव्य-नियम समझाकर तथा शुश्रूषा एवं समाधि द्वारा प्राप्त होने वाले कर्मों का वर्णन करके एकाग्रचित्त होकर अपने आश्रम को चले गये। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! शास्त्रों के अर्थ को जानने वाले महामुनि पराशर इस प्रकार चारों वर्णों के कर्तव्य-नियम समझाकर तथा शुश्रूषा एवं समाधि द्वारा प्राप्त होने वाले कर्मों का वर्णन करके एकाग्रचित्त होकर अपने आश्रम को चले गये।
Bhishmaji says – Yudhishthir! The great sage Parashar, who knew the meaning of the scriptures, thus explaining the rules of duty for the four varnas and describing the activities to be achieved through Shushrusha and Samadhi, went to his ashram with a concentrated mind.
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥