Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d130-d131: ये आठ प्रकृतियाँ और ऊपर वर्णित सोलह विकार - इन चौबीस तत्त्वों को यहाँ रहने वाले बुद्धिमान पुरुष को जानना चाहिए। इस प्रकार प्रकृति पुरुष का विवेक पाकर मनुष्य देह के बंधन से ऊपर उठकर भवसागर से पार हो जाता है, अन्यथा नहीं। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये आठ प्रकृतियाँ और ऊपर वर्णित सोलह विकार - इन चौबीस तत्त्वों को यहाँ रहने वाले बुद्धिमान पुरुष को जानना चाहिए। इस प्रकार प्रकृति पुरुष का विवेक पाकर मनुष्य देह के बंधन से ऊपर उठकर भवसागर से पार हो जाता है, अन्यथा नहीं।
These eight natures and the sixteen vices mentioned above – these twenty-four elements should be known by the wise man living here. In this way, by having the discretion of Prakriti Purusha, man rises above the bondage of the body and crosses the ocean of existence, otherwise not.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥