Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d129: पाँच तन्मात्राएँ, मन, अहंकार और अव्यक्त - ये आठ प्रकृतियाँ हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d129
 
 
श्लोक  13.99.d129 
तन्मात्राण्यपि पञ्चैव मनोऽहंकार एव च॥
अष्टमं चाप्यथाव्यक्तमेता: प्रकृतिसंज्ञिता:।
 
 
अनुवाद
पाँच तन्मात्राएँ, मन, अहंकार और अव्यक्त - ये आठ प्रकृतियाँ हैं।
 
Five tanmatras, mind, ego and the unmanifested – these are the eight natures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)