Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d126: जो व्यक्ति योगयुक्त नहीं है, वह अपने हृदय में स्थित उस महेश्वर का साक्षात्कार नहीं कर सकता। केवल योगयुक्त पुरुष ही अपने मन को हृदय में स्थापित करता है और अपनी बुद्धि के द्वारा अन्तर्यामी ईश्वर का दर्शन करता है। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो व्यक्ति योगयुक्त नहीं है, वह अपने हृदय में स्थित उस महेश्वर का साक्षात्कार नहीं कर सकता। केवल योगयुक्त पुरुष ही अपने मन को हृदय में स्थापित करता है और अपनी बुद्धि के द्वारा अन्तर्यामी ईश्वर का दर्शन करता है।
A person who is not Yogayukt cannot realize that Maheshwar present in his heart. Only a man having yoga establishes his mind in his heart and sees the inner God through his intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥