Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d124-d125: बुद्धिमान साधक को अपने हृदय में स्थित परमपिता परमात्मा का साक्षात्कार करना चाहिए। जैसे आकाश में बिजली का प्रकाश दिखाई देता है और जैसे सूर्य किरणों से प्रकाशित होता है, वैसे ही उस परमपिता परमात्मा को धूम्ररहित अग्नि के समान तेजस्वी रूप में प्रकाशित देखें। आइए, हम अपनी बुद्धि के नेत्रों से हृदय में स्थित उस अविनाशी सनातन परमात्मा का दर्शन करें। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बुद्धिमान साधक को अपने हृदय में स्थित परमपिता परमात्मा का साक्षात्कार करना चाहिए। जैसे आकाश में बिजली का प्रकाश दिखाई देता है और जैसे सूर्य किरणों से प्रकाशित होता है, वैसे ही उस परमपिता परमात्मा को धूम्ररहित अग्नि के समान तेजस्वी रूप में प्रकाशित देखें। आइए, हम अपनी बुद्धि के नेत्रों से हृदय में स्थित उस अविनाशी सनातन परमात्मा का दर्शन करें।
A wise seeker should realize the Supreme God present in his heart. Just as the light of electricity is seen in the sky and just as the sun is illuminated with rays, in the same way, see that Supreme God illuminated in a radiant form like smokeless fire. Let us see that imperishable eternal God present in the heart through the eyes of our intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥