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mahabharat 13.99.d123: सबसे पहले किसी स्वच्छ और बंद स्थान पर जाकर आसन ग्रहण करें, उस पर धैर्यपूर्वक बैठें और शास्त्रों में बताई गई विधि के अनुसार ध्यान करने का प्रयास करें।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d123
 
 
श्लोक  13.99.d123 
धृत्याऽऽसीत ततो गत्वा शुद्धदेशं सुसंवृतम्॥
लब्ध्वाऽऽसनं यथादृष्टं विधिपूर्वं समाचरेत्।
 
 
अनुवाद
सबसे पहले किसी स्वच्छ और बंद स्थान पर जाकर आसन ग्रहण करें, उस पर धैर्यपूर्वक बैठें और शास्त्रों में बताई गई विधि के अनुसार ध्यान करने का प्रयास करें।
 
First go to a clean and enclosed place, take a seat, sit on it patiently and try to meditate according to the method prescribed by the scriptures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)