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mahabharat 13.99.d120: इसलिए किसी को भी ज्ञान का घमंड नहीं करना चाहिए। ज्ञान का परिणाम शांति है, इसलिए हमेशा शांति के लिए प्रयास करें।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d120
 
 
श्लोक  13.99.d120 
एवमेव हि नोत्सेक: कर्तव्यो ज्ञानसम्भव:॥
फलं ज्ञानस्य हि शम: प्रशमाय यतेत् सदा।
 
 
अनुवाद
इसलिए किसी को भी ज्ञान का घमंड नहीं करना चाहिए। ज्ञान का परिणाम शांति है, इसलिए हमेशा शांति के लिए प्रयास करें।
 
Therefore, no one should be proud of knowledge. The result of knowledge is peace, so always strive for peace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)