Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d12: ब्राह्मणों का धन वेदों और शास्त्रों का स्वाध्याय है, क्षत्रियों का धन बल है, वैश्यों का धन व्यापार और कृषि है, और शूद्रों का धन तीनों वर्णों की सेवा है। इस धर्मरूपी धन को नष्ट करके मनुष्य नरक में जाता है। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणों का धन वेदों और शास्त्रों का स्वाध्याय है, क्षत्रियों का धन बल है, वैश्यों का धन व्यापार और कृषि है, और शूद्रों का धन तीनों वर्णों की सेवा है। इस धर्मरूपी धन को नष्ट करके मनुष्य नरक में जाता है।
The wealth of Brahmins is self-study of the Vedas and scriptures, the wealth of Kshatriyas is strength, the wealth of Vaishyas is business and agriculture, and the wealth of Shudras is service to the three castes. By destroying this wealth of religion, a man goes to hell.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥