Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d119: जिस व्यक्ति ने पहले कभी कल्याण नहीं देखा, वह अपने अभिमान के कारण मोहित हो जाता है और शास्त्रों में बताई गई विधि को नहीं देख पाता, इसलिए उसे सच्चा ज्ञान नहीं मिलता।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d119
 
 
श्लोक  13.99.d119 
अदृष्टपूर्वकल्याणो यथादृष्टविधिर्नर:॥
उत्सेकान्मोहमापद्य तत्त्वज्ञानं न चाप्नुयात्।
 
 
अनुवाद
जिस व्यक्ति ने पहले कभी कल्याण नहीं देखा, वह अपने अभिमान के कारण मोहित हो जाता है और शास्त्रों में बताई गई विधि को नहीं देख पाता, इसलिए उसे सच्चा ज्ञान नहीं मिलता।
 
A person who has never seen welfare before, gets deluded due to his pride and does not see the method prescribed in the scriptures. Hence, he does not get the true knowledge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)