Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d114-d115: फिर विद्वान ब्राह्मण या विद्वान क्षत्रिय की मुक्ति के विषय में क्या कहा जा सकता है? जिसके पाप नष्ट नहीं हुए हैं, उसे ज्ञान प्राप्त नहीं होता। जब मनुष्य को ज्ञान प्राप्त होता है, तब वह सफल होता है। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं पुनर्ब्राह्मणो विद्वान् क्षत्रियो वा बहुश्रुत:॥
न चाप्यक्षीणपापस्य ज्ञानं भवति देहिन:।
ज्ञानोपलब्धिर्भवति कृतकृत्यो यदा भवेत्॥
अनुवाद
फिर विद्वान ब्राह्मण या विद्वान क्षत्रिय की मुक्ति के विषय में क्या कहा जा सकता है? जिसके पाप नष्ट नहीं हुए हैं, उसे ज्ञान प्राप्त नहीं होता। जब मनुष्य को ज्ञान प्राप्त होता है, तब वह सफल होता है।
Then what can be said about the salvation of a learned Brahmin or a learned Kshatriya. A mortal whose sins have not been destroyed does not get knowledge. When a man gets knowledge, then he becomes successful.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥