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mahabharat 13.99.d113: इस धर्म का आश्रय लेकर पाप योनि में जन्म लेने वाले स्त्री-पुरुष, वैश्य और शूद्र भी परम मोक्ष को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d113
 
 
श्लोक  13.99.d113 
इमं हि धर्ममास्थाय येऽपि स्यु: पापयोनय:॥
स्त्रियो वैश्याश्च शूद्राश्च प्राप्नुयु: परमां गतिम्।
 
 
अनुवाद
इस धर्म का आश्रय लेकर पाप योनि में जन्म लेने वाले स्त्री-पुरुष, वैश्य और शूद्र भी परम मोक्ष को प्राप्त होते हैं।
 
By taking shelter of this religion, men and women born in sinful wombs, Vaishyas and Shudras also attain the ultimate salvation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)