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mahabharat 13.99.d109: जो शुभ कर्म करता है उसे शुभ फल ही प्राप्त होते हैं और जो अशुभ कर्म करता है उसे अशुभ फल ही प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d109
 
 
श्लोक  13.99.d109 
शुभकर्मसमाचार: शुभमेवाप्नुते फलम्॥
तथाशुभसमाचारो ह्यशुभं समवाप्नुते।
 
 
अनुवाद
जो शुभ कर्म करता है उसे शुभ फल ही प्राप्त होते हैं और जो अशुभ कर्म करता है उसे अशुभ फल ही प्राप्त होते हैं।
 
One who performs auspicious deeds receives only auspicious results and one who performs inauspicious deeds receives only inauspicious results.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)