Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d108: मनुष्य जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उसे उसका फल अवश्य मिलता है। जो कर्म नहीं किए गए हैं, उनका फल किसी को नहीं भोगना पड़ता और जो कर्म किए गए हैं, उनका फल बिना काटे नष्ट नहीं होता। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत् करोति यदश्नाति शुभं वा यदि वाशुभम्॥
नाकृतं भुज्यते कर्म न कृतं नश्यते फलम्।
अनुवाद
मनुष्य जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उसे उसका फल अवश्य मिलता है। जो कर्म नहीं किए गए हैं, उनका फल किसी को नहीं भोगना पड़ता और जो कर्म किए गए हैं, उनका फल बिना काटे नष्ट नहीं होता।
Whatever good or bad deeds a man does, he reaps the fruits of the same. No one has to reap the fruits of deeds that have not been done and the fruits of deeds that have been done are not destroyed without being reaped.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥