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श्लोक  13.99.d1 
युधिष्ठिर उवाच
शूद्राणामिह शुश्रूषा नित्यमेवानुवर्णिता।
कै: कारणै: कतिविधा शुश्रूषा समुदाहृता॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- पितामह! इस संसार में द्विज वर्ण की सेवा ही शूद्रों के लिए परम धर्म कही गई है। ऐसा किन कारणों से और कितने प्रकार की सेवा कही गई है?
 
Yudhishthira asked- Grandfather! In this world, service to the Dwija castes has always been said to be the ultimate religion for Shudras. For what reasons and how many types of service has it been said?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)