श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 98: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानकी प्रशंसा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.98.7 
सूर्य उवाच
असंशयं मां विप्रर्षे भेत्स्यसे धन्विनां वर।
अपकारिणं मां विद्धि भगवन् शरणागतम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सूर्य बोले- हे धनुर्धरों में श्रेष्ठ विप्रर्षे! आप अवश्य ही मेरे शरीर को भेद सकते हैं। हे प्रभु! यद्यपि मैंने आपका अपमान किया है, फिर भी कृपया मुझे अपना शरणागत मानिए।
 
Surya said- O Viprarshe, the best among archers! You can certainly pierce my body. O Lord! Even though I have offended you, please consider me as your refugee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)