श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 98: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानकी प्रशंसा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.98.5 
जमदग्निरुवाच
स्थिरं चापि चलं चापि जाने त्वां ज्ञानचक्षुषा।
अवश्यं विनयाधानं कार्यमद्य मया तव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जमदग्नि बोले, "हमारा लक्ष्य चाहे चंचल हो या स्थिर, हमने अपनी बुद्धि से यह जान लिया है कि आप सूर्य हैं। अतः आज हम आपको दण्ड देकर अवश्य ही विनम्र बना देंगे।"
 
Jamadagni said, "Whether our target is fickle or steady, we have recognised with our wisdom that you are the Sun. Therefore, today by punishing you, we will certainly make you humble." 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)