चलं निमित्तं विप्रर्षे सदा सूर्यस्य गच्छत:।
कथं चलं भेत्स्यसि त्वं सदा यान्तं दिवाकरम्॥ ४॥
अनुवाद
‘विप्रसे! तुम्हारा लक्ष्य तो गतिमान है, सूर्य भी सदैव गतिमान रहता है। अतः तुम निरंतर भ्रमण करते हुए सूर्यरूपी गतिमान लक्ष्य को कैसे भेद सकोगे?’॥4॥
‘Viprarse! Your target is moving, the Sun too keeps moving always. So how will you pierce the moving target in the form of the Sun while constantly travelling?’॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥