एतत् ते भरतश्रेष्ठ मया कात्स्न्र्येन कीर्तितम्।
छत्रोपानहदानस्य फलं भरतसत्तम॥ २२॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! भरतश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें छाते और जूते दान करने का पूरा लाभ बताया है। 22.
Best of the Bharatas! Best of the Bharatas! I have told you the full benefits of donating umbrellas and shoes. 22.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि छत्रोपानहदानप्रशंसा नाम षण्णवतितमोऽध्याय:॥ ९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें छत्रदान और उपानहदानकी प्रशंसानामक छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १७५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १९७ १/२ श्लोक हैं, this chapter is split into 4 chapters, this and next 3 ahead)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥