Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.98.17: अतः आपको ब्राह्मणों को उत्तम छाते और जूते दान करने चाहिए। उनके दान से महान पुण्य की प्राप्ति होगी। मुझे भी इस विषय में कोई संदेह नहीं है। 17.   |   mahabharat अध्याय 13.98: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 98: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानकी प्रशंसा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.98.17 
तस्मात् प्रयच्छ विप्रेषु छत्रोपानहमुत्तमम्।
धर्मस्तेषु महान् भावी न मेऽत्रास्ति विचारणा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अतः आपको ब्राह्मणों को उत्तम छाते और जूते दान करने चाहिए। उनके दान से महान पुण्य की प्राप्ति होगी। मुझे भी इस विषय में कोई संदेह नहीं है। 17.
 
Therefore, you should give the best umbrellas and shoes to the Brahmins. Their donation will lead to great virtue. I also have no doubt in this matter. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)