श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 98: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानकी प्रशंसा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.98.16 
भीष्म उवाच
छत्रोपानहमेतत् तु सूर्येणैतत् प्रवर्तितम्।
पुण्यमेतदभिख्यातं त्रिषु लोकेषु भारत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - भारत! छाता और जूता - इन दोनों वस्तुओं की उत्पत्ति सूर्य से हुई है। इन वस्तुओं का दान तीनों लोकों में पवित्र माना जाता है॥ 16॥
 
Bhishmaji says - Bharat! The origin of both the things - umbrella and shoes - was started by the Sun. Donation of these things is considered sacred in all the three worlds.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)