श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 98: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानकी प्रशंसा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.98.14 
सूर्य उवाच
महर्षे शिरसस्त्राणं छत्रं मद्रश्मिवारणम्।
प्रतिगृह्णीष्व पद्भॺां च त्राणार्थं चर्मपादुके॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सूर्यदेव बोले, "महर्षि! यह छत्र मेरी किरणों को रोककर आपके सिर की रक्षा करेगा और ये चमड़े के बने जूते हैं, जो आपके पैरों को जलने से बचाने के लिए भेंट किए गए हैं। कृपया इन्हें स्वीकार करें।" ॥14॥
 
The Sun God said, "Maharishi! This umbrella will protect your head by warding off my rays and these are a pair of shoes made of leather which have been presented to protect your feet from burning. Please accept them." ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)