भवेत् स गुरुतल्पी च ब्रह्महा च स वै भवेत्।
सुरापानं स कुर्याच्च यो हन्याच्छरणागतम्॥ ११॥
अनुवाद
जो शरणागत मनुष्य का वध करता है, वह गुरुपत्नी के साथ व्यभिचार, ब्राह्मणहत्या और मद्यपान आदि पापों का भागी होता है। ॥11॥
He who kills a person who has sought refuge in a refugee commits the sins of adultery with the wife of his guru, murder of a brahmin, and drinking alcohol.' ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥