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mahabharat 13.97.9-11h: बाण चलाने का यह खेल खेलते-खेलते ज्येष्ठ मास का सूर्य मध्याह्न में पहुँच गया। महाबली ब्राह्मण जमदग्नि ने पुनः बाण छोड़ा और रेणुका से कहा- 'सुभ्रु! विशाल नेत्रों वाली! जाओ और मेरे धनुष से छोड़े गए इन बाणों को ले आओ, जिससे मैं इन्हें पुनः धनुष पर चढ़ाकर छोड़ सकूँ।'   |   mahabharat अध्याय 13.97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप  »  श्लोक 9-11h
 
 
श्लोक  13.97.9-11h 
ततो मध्याह्नमारूढे ज्येष्ठामूले दिवाकरे॥ ९॥
स सायकान् द्विजो मुक्त्वा रेणुकामिदमब्रवीत्।
गच्छानय विशालाक्षि शरानेतान् धनुश्च्युतान्॥ १०॥
यावदेतान् पुन: सुभ्रु क्षिपामीति जनाधिप।
 
 
अनुवाद
बाण चलाने का यह खेल खेलते-खेलते ज्येष्ठ मास का सूर्य मध्याह्न में पहुँच गया। महाबली ब्राह्मण जमदग्नि ने पुनः बाण छोड़ा और रेणुका से कहा- 'सुभ्रु! विशाल नेत्रों वाली! जाओ और मेरे धनुष से छोड़े गए इन बाणों को ले आओ, जिससे मैं इन्हें पुनः धनुष पर चढ़ाकर छोड़ सकूँ।'
 
While playing this game of shooting arrows, the Sun of the month of Jyeshtha reached the middle of the day. The great Brahmin Jamadagni again released an arrow and said to Renuka- 'Subhru! Huge-eyed one! Go and bring these arrows that have been released from my bow, so that I can again put them on the bow and release them.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)