Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.97.3: जब अनेक कारण उपस्थित हों, तब पुण्य के निमित्त इन वस्तुओं का दान करने का विधान है। अतः हे राजन! मैं इस विषय को विस्तारपूर्वक तथा यथार्थ रूप में सुनना चाहता हूँ।॥3॥ | mahabharat अध्याय 13.97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब अनेक कारण उपस्थित हों, तब पुण्य के निमित्त इन वस्तुओं का दान करने का विधान है। अतः हे राजन! मैं इस विषय को विस्तारपूर्वक तथा यथार्थ रूप में सुनना चाहता हूँ।॥3॥
When many reasons are present, the practice of donating these things for the purpose of meritorious deeds is observed. Therefore, O King! I wish to hear about this topic in detail and in its true form. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥