श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.97.27 
रमणीयानि यावन्ति यावदारम्भकाणि च।
सर्वमन्नात् प्रभवति विदितं कीर्तयामि ते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
अन्न से ही सब सुन्दर वस्तुएँ या सब उत्पादक वस्तुएँ उत्पन्न होती हैं। ये सब बातें जो तुम्हें पहले से ही ज्ञात हैं, मैं तुमसे कह रहा हूँ॥27॥
 
All beautiful things or all productive things emerge from food. I am telling you all these things which are already known to you.॥ 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd