श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.97.24 
ततस्तदौषधीनां च वीरुधां पुष्पपत्रजम्।
सर्वं वर्षाभिनिर्वृत्तमन्नं सम्भवति प्रभो॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उससे नाना प्रकार की औषधियाँ, लताएँ, पत्ते, फूल, घास आदि उगते हैं। हे प्रभु! प्रायः सभी प्रकार के अन्न वर्षा के जल से उगते हैं॥24॥
 
‘From that, various types of medicines, creepers, leaves, flowers, grass etc. grow. O Lord! Almost all types of food grains grow from rain water.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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