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श्लोक 13.97.24  |
ततस्तदौषधीनां च वीरुधां पुष्पपत्रजम्।
सर्वं वर्षाभिनिर्वृत्तमन्नं सम्भवति प्रभो॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| उससे नाना प्रकार की औषधियाँ, लताएँ, पत्ते, फूल, घास आदि उगते हैं। हे प्रभु! प्रायः सभी प्रकार के अन्न वर्षा के जल से उगते हैं॥24॥ |
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| ‘From that, various types of medicines, creepers, leaves, flowers, grass etc. grow. O Lord! Almost all types of food grains grow from rain water.॥ 24॥ |
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