श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.97.23 
अथाम्रेषु निगूढश्च रश्मिभि: परिवारित:।
सप्तद्वीपानिमान् ब्रह्मन् वर्षेणाभिप्रवर्षति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! भगवान सूर्य अपनी किरणों से घिरे हुए बादलों में छिप जाते हैं और सातों द्वीपों की पृथ्वी को वर्षा के जल से भर देते हैं॥23॥
 
Brahman! Lord Surya, surrounded by his rays, hides in the clouds and floods the earth of the seven islands with rain water. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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