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श्लोक 13.97.20  |
अथ तं प्रेक्ष्य सन्नद्धं सूर्योऽभ्येत्य तथाब्रवीत्।
द्विजरूपेण कौन्तेय किं ते सूर्योऽपराध्यते॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| कुन्तीपुत्र! उसे युद्ध के लिए तैयार देखकर सूर्यदेव ब्राह्मण का रूप धारण करके उसके पास आये और बोले - 'ब्रह्मन्! सूर्यदेव ने तुम्हारा क्या अपराध किया है? |
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| Kunti's son! Seeing him ready for battle, the Sun God took the form of a Brahmin and came to him and said - 'Brahman! What crime has the Sun done to you? |
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