श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.97.2 
कथं चैतत् समुत्पन्नं किमर्थं चैव दीयते।
न केवलं श्राद्धकृत्ये पुण्यकेष्वपि दीयते॥ २॥
 
 
अनुवाद
ये कैसे अस्तित्व में आए और इनका दान क्यों किया जाता है? इनका दान केवल श्राद्ध के समय ही नहीं, अपितु अनेक शुभ अवसरों पर भी किया जाता है।॥2॥
 
How did they come into existence and why are they donated? They are donated not only during the Shraddha ceremony but also on many auspicious occasions.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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