श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.97.1 
युधिष्ठिर उवाच
यदिदं श्राद्धकृत्येषु दीयते भरतर्षभ।
छत्रं चोपानहौ चैव केनैतत् सम्प्रवर्तितम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, 'हे भरतश्रेष्ठ! श्राद्धकर्म में दान किए जाने वाले छत्र और उपनहस की परंपरा किसने शुरू की?'
 
Yudhishthira asked, 'O best of the Bharatas! Who started the tradition of donating umbrellas and upanahas which are donated during Shraddha ceremonies?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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