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mahabharat 13.96.9: तब अगस्त्यजी ने उन सभी ऋषियों से पूछा - 'मेरे सुंदर कमल पुष्पों को किसने ले लिया है? मुझे आप सभी पर संदेह है। कृपया मेरे कमल पुष्प लौटा दीजिए। आप जैसे मुनियों को कमल चुराना कदापि उचित नहीं है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.96.9 
तानाह सर्वानृषिमुख्यानगस्त्य:
केनादत्तं पुष्करं मे सुजातम्।
युष्मान् शंके पुष्करं दीयतां मे
न वै भवन्तो हर्तुमर्हन्ति पद्मम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब अगस्त्यजी ने उन सभी ऋषियों से पूछा - 'मेरे सुंदर कमल पुष्पों को किसने ले लिया है? मुझे आप सभी पर संदेह है। कृपया मेरे कमल पुष्प लौटा दीजिए। आप जैसे मुनियों को कमल चुराना कदापि उचित नहीं है॥9॥
 
Then Agastya asked all those sages - 'Who has taken my beautiful lotus flowers? I doubt all of you. Please return my lotus flowers. It is never right for saints like you to steal lotuses.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)