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यश्च शास्त्रमधीयीत ऋषिभि: परिपालितम्।
स गच्छेद् ब्रह्मणो लोकमव्ययं च नरोत्तम॥ ५४॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! जो मनुष्य ऋषियों द्वारा सुरक्षित इस शास्त्र का अध्ययन करता है, वह अविनाशी ब्रह्मधाम को प्राप्त होता है।
O best of men! One who studies this scripture preserved by the sages attains the imperishable Brahmadham. 54.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि शपथविधिर्नाम चतुर्नवतितमोऽध्याय:॥ ९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें शपथविधिनामक चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥