Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.96.54: हे पुरुषश्रेष्ठ! जो मनुष्य ऋषियों द्वारा सुरक्षित इस शास्त्र का अध्ययन करता है, वह अविनाशी ब्रह्मधाम को प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  13.96.54 
यश्च शास्त्रमधीयीत ऋषिभि: परिपालितम्।
स गच्छेद् ब्रह्मणो लोकमव्ययं च नरोत्तम॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! जो मनुष्य ऋषियों द्वारा सुरक्षित इस शास्त्र का अध्ययन करता है, वह अविनाशी ब्रह्मधाम को प्राप्त होता है।
 
O best of men! One who studies this scripture preserved by the sages attains the imperishable Brahmadham. 54.
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि शपथविधिर्नाम चतुर्नवतितमोऽध्याय:॥ ९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें शपथविधिनामक चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)