Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.53: उस पर कोई विपत्ति नहीं आती। वह चिन्तामुक्त रहता है। वृद्धावस्था उसे नहीं घेरती। वह आसक्तिरहित होकर कल्याण का भोग करता है और मरने के बाद स्वर्ग को जाता है ॥ 53॥ | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तमापत् स्पृशेत् काचिद् विज्वरो न जरावह:।
विरजा: श्रेयसा युक्त: प्रेत्य स्वर्गमवाप्नुयात्॥ ५३॥
अनुवाद
उस पर कोई विपत्ति नहीं आती। वह चिन्तामुक्त रहता है। वृद्धावस्था उसे नहीं घेरती। वह आसक्तिरहित होकर कल्याण का भोग करता है और मरने के बाद स्वर्ग को जाता है ॥ 53॥
No calamity befalls him. He is free from worries. Old age does not attack him. He is devoid of attachment and enjoys welfare and after death he goes to heaven. ॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥