Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.48: आज मैंने आपसे उस मंगलमय सनातन धर्म का श्रवण किया जो नित्य अपरिवर्तनशील, अपरिवर्तनशील और संसार सागर से पार जाने के लिए सेतु के समान है। इससे धर्मशास्त्रों की श्रेष्ठता सिद्ध होती है। 48॥ | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आज मैंने आपसे उस मंगलमय सनातन धर्म का श्रवण किया जो नित्य अपरिवर्तनशील, अपरिवर्तनशील और संसार सागर से पार जाने के लिए सेतु के समान है। इससे धर्मशास्त्रों की श्रेष्ठता सिद्ध होती है। 48॥
Today, I have heard from you that auspicious Sanatan Dharma which is eternally unchangeable, unchangeable and like a bridge to cross the worldly ocean. This proves the excellence of religious scriptures. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥