Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.47: इन्द्र ने कहा, "प्रभु! मैंने ये कमल लोभ से नहीं लिए थे। मैं आप सभी से धर्म के वचन सुनना चाहता था, इसीलिए मैंने इन कमलों का अपहरण किया था। अतः आप मुझ पर क्रोधित न हों।" 47. | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्र उवाच
न मया भगवँल्लोभाद्धृतं पुष्करमद्य वै।
धर्मांस्तु श्रोतुकामेन हृतं न क्रोद्धुमर्हसि॥ ४७॥
अनुवाद
इन्द्र ने कहा, "प्रभु! मैंने ये कमल लोभ से नहीं लिए थे। मैं आप सभी से धर्म के वचन सुनना चाहता था, इसीलिए मैंने इन कमलों का अपहरण किया था। अतः आप मुझ पर क्रोधित न हों।" 47.
Indra said, "Lord! I did not take these lotuses out of greed. I wanted to hear the words of dharma from you all, that is why I kidnapped these lotuses. So please do not be angry with me." 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥