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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  13.96.45 
सर्वान् वेदानधीयीत पुण्यशीलोऽस्तु धार्मिक:।
ब्रह्मण: सदनं यातु यस्ते हरति पुष्करम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जिसने आपके कमल का अपहरण किया है, उसे सम्पूर्ण वेदों का अध्ययन करना चाहिए। वह सदाचारी और धार्मिक हो तथा मरने के बाद ब्रह्माजी के लोक में जाए।
 
The one who has kidnapped your lotus should study the entire Vedas. He should be virtuous and religious, and after death he should go to the world of Brahmaji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)