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mahabharat 13.96.44: इन्द्र ने कहा, "ब्राह्मण! जिसने आपका कमल लिया है, वह कन्या किसी यजुर्वेदी या सामवेदी विद्वान को दे दे, जो ब्रह्मचर्य व्रत पूर्ण करके आया हो। अथवा वह ब्राह्मण अथर्ववेद का अध्ययन पूर्ण करके शीघ्र ही स्नातक बन जाए।" 44.   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.96.44 
शक्र उवाच
अध्वर्यवे दुहितरं ददातु
छन्दोगे वा चरितब्रह्मचर्ये।
अथर्वणं वेदमधीत्य विप्र:
स्नायीत य: पुष्करमाददाति॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा, "ब्राह्मण! जिसने आपका कमल लिया है, वह कन्या किसी यजुर्वेदी या सामवेदी विद्वान को दे दे, जो ब्रह्मचर्य व्रत पूर्ण करके आया हो। अथवा वह ब्राह्मण अथर्ववेद का अध्ययन पूर्ण करके शीघ्र ही स्नातक बन जाए।" 44.
 
Indra said, "Brahmin! The one who has taken your lotus should give the daughter to a Yajurvedi or Samvedi scholar who has come after completing the vow of celibacy. Or that Brahmin should complete the study of Atharvaveda and become a graduate soon." 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)