Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.42: भीष्म कहते हैं - हे कौरवेन्द्र! जब सब लोग इस प्रकार अनेक प्रकार की शपथें ले चुके, तब सहस्र नेत्रों वाले देवराज इन्द्र अत्यन्त प्रसन्न हुए और क्रोधित ब्राह्मण अगस्त्य को देखकर उनके समक्ष प्रकट हुए। | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म कहते हैं - हे कौरवेन्द्र! जब सब लोग इस प्रकार अनेक प्रकार की शपथें ले चुके, तब सहस्र नेत्रों वाले देवराज इन्द्र अत्यन्त प्रसन्न हुए और क्रोधित ब्राह्मण अगस्त्य को देखकर उनके समक्ष प्रकट हुए।
Bhishma says - O Kauravendra! When all the people had taken various oaths in this manner, then the thousand-eyed Devaraj Indra became very pleased and on seeing the angry Brahmin Agastya, he appeared before him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥