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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.96.38 
अरुन्धत्युवाच
श्वश्र्वापवादं वदतु भर्तुर्भवतु दुर्मना:।
एका स्वादु समश्नातु या ते हरति पुष्करम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अरुन्धती ने कहा: जिस स्त्री ने आपका कमल ग्रहण किया है, वह अपनी सास की निन्दा करे, अपने पति के प्रति द्वेष रखे तथा अकेले स्वादिष्ट भोजन करे; अर्थात् उसे इन सब पापों का फल भोगना चाहिए।
 
Arundhati said: The woman who has taken your lotus should slander her mother-in-law, harbor ill-will towards her husband and eat delicious food alone; that is, she should suffer the consequences of all these sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)