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mahabharat 13.96.36: अष्टक ने कहा - जिस राजा ने आपका कमल छीन लिया है, वह मंदबुद्धि, स्वेच्छाचारी और पापी होगा तथा इस पृथ्वी पर अन्यायपूर्वक शासन करेगा। 36.   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.96.36 
अष्टक उवाच
स राजास्त्वकृतप्रज्ञ: कामवृत्तश्च पापकृत्।
अधर्मेणाभिशास्तूर्वीं यस्ते हरति पुष्करम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
अष्टक ने कहा - जिस राजा ने आपका कमल छीन लिया है, वह मंदबुद्धि, स्वेच्छाचारी और पापी होगा तथा इस पृथ्वी पर अन्यायपूर्वक शासन करेगा। 36.
 
Ashtak said - The king who has taken away your lotus will be a dull-witted, self-willed and sinful person and will rule this earth unjustly. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)