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mahabharat 13.96.31: नाभाग ने कहा - जिसने आपका कमल चुराया है, वह सदैव झूठ बोलने, मुनियों से युद्ध करने तथा आपकी पुत्री को मोल लेकर बेचने के पाप का दोषी रहेगा ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.96.31 
नाभाग उवाच
अनृतं भाषतु सदा सद्भिश्चैव विरुध्यतु।
शुल्केन तु ददत्कन्यां यस्ते हरति पुष्करम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
नाभाग ने कहा - जिसने आपका कमल चुराया है, वह सदैव झूठ बोलने, मुनियों से युद्ध करने तथा आपकी पुत्री को मोल लेकर बेचने के पाप का दोषी रहेगा ॥31॥
 
Naabhaga said - The one who has stolen your lotus will always be guilty of the sins of telling lies, of fighting with the saints and of selling your daughter for a price. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)